Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
क्व कार्यकालकलनाः क्व भूतभुवनभ्रमः ।
क्व विद्याधरगन्धर्वाः क्व नरामरदानवाः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
कहाँ क्रिया, काल और कल्पनाएँ हैं, कहाँ भूतो के (देवता आदि के) निवासस्थान
भ्रम हैं, कहाँ विद्याधर एवं गन्धर्व हैं तथा कहाँ मनुष्य, देव और दानव हैं ?