Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
नित्यानुभव एवात्र दर्शने कारणं मम ।
तदभावो मुने मन्ये ते कारणमदर्शने ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, हमको जो उन लोगों का दर्शन हो रहा है,
उसमें कारण नित्य का अनुभव ही है, वह नित्य का अनुभव आपको है नहीं, इसलिए उसका
अभाव ही जगत् के न रहने में कारण है