Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अन्यच्च चिरकालैकद्वैतसंकथयानया ।
शुद्धातिवाहिकैकात्मदेहता विस्मृतावयोः ओ ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त सुक्ष्मातियूक्ष्म पदार्थों के अवलोकन में समर्थ विशुद्ध मनोरूप देह के विस्मरण से भी
आपको वह जयत् नहीं दीखता और हमको दीखता हे, पर अस्फुट यह कहती है /
दूसरी बात यह कि मैंने चिरकाल तक अपने लोगों की यह जो एक द्वैत विषय की कथा चली,
उससे विशुद्ध सूक्ष्म मनोमात्ररूप देह का हम लोगों को विस्मरण हो गया है, इसलिए आपको जगत्
नहीं दीखता और हमको अस्फुट दीखता है