Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
सर्वस्य जन्तुजातस्य सर्ववस्त्ववभासने ।
सर्वदैवैक एवोच्चैर्जयत्यभ्यासभास्करः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जितने प्राणी हैं, उन सबके लिए सदा ही सब वस्तुओं का प्रकाश
करनेवाला एक अभ्यासरूपी सूर्य सर्वोच्च है