Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 67, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 67, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 67 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
चतुर्दशविधायास्तु भूतजातेर्न कस्यचित् ।
सिध्यत्यभिमतं वस्तु विनाभ्यासमकृत्रिमम् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
चौदह भुवनं मेँ स्थित चौदह प्रकार की
जो प्राणियों की जातियाँ है, उनमें किसी भी प्राणी की स्वाभाविक अभीष्ट वस्तु अभ्यास के
बिना सिद्ध नहीं होती