Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
भ्रममभ्रमतां यातमभ्रमं भ्रमतां गतम् ।
वेत्ति जीवो विचारेण विनाहो नु विमूढता ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, विचार न रहने के
कारण यह जीव भ्रम में अभ्रमरूपता ओर अभ्रम में भ्रमरूपता प्राप्त है, यह समझता हे । अहो, यह
कैसी मूढता है