Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
आधिभौतिकदेहोऽयं विचारेण न लभ्यते ।
आतिवाहिकदेहस्तु किल लोकद्वयेऽक्षयः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
बहुत विचार कर देखने से यह आधिभौतिक स्थूल शरीर उपलब्ध नहीं होता
ओर आतिवाहिक -सूक्ष्म शरीर तो मोक्षपर्यन्त इस लोक और परलोक में भी समस्त व्यवहार का
निर्वाहक होने से अक्षय है