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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

जाताधिभौतिकी संविदातिवाहिकचित्क्रमे । देहदृष्टिवशात्प्रौढा स्थाणौ पुरुषधीरिव ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

सूक्ष्मशरीरउपहित चिति क्रम में उत्पन्न हुई आधिभौतिकी बुद्धि यानी स्थूलबुद्धि स्थूलशरीर की दृष्टि की वश से ऐसे प्रौढ हो गई है, जैसे स्थाणु (दुंठ) में पुरुष बुद्धि