Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
प्रत्यक्ष एव भावत्वे नष्टे क्वेवानुमादयः ।
उह्यन्ते वारणा यत्र तत्रोर्णायुषु का कथा ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
जब स़ाक्षात् अर्थो की साधक वश्च आदि इन्द्रियों की ऐसी दशा है, तब भला तन्मूलक अनुमान
आदि प्रमार्णो के विषय में क्या पूछना 2 यह कहते हैं /
जब प्रत्यक्ष में ही भावत्व नष्ट हैं यानी जब प्रत्यक्ष की ही सत्ता सिद्ध नहीं है तब उसके अधीन
अनुमान आदि प्रमाणों की कहाँ गति है ? जहाँ बड़े-बड़े हाथी बह जाते हैं वहाँ भेड़ों की क्या कथा
है ?