Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 68, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 68, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
अतः प्रमाणसंसिद्धं दृश्यं नास्त्येव कुत्रचित् ।
अनन्यदिदमस्तीव तत्तद्ब्रह्मघनं घनम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए जो कुछ हमने कहा है उसका स्फूरित यही है कि प्रमाणसिद्ध दृश्य प्रपंच कहीं
भी नहीं है । जो यह सद्रूप एक “अस्तीव” (है-जैसा) भासित हो रहा है वह सैंधव (नमक) के टुकड़े
के समान चिद्घन ब्रह्म ही है