Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
कथमेषा त्वया देव जायार्थं जनिता सती ।
नेह जायापदं नीता नीता विरसतां कथम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देव, आपने अपनी भार्या बनाने के निमित्त इसे क्यों उत्पन्न किया ?
उत्पन्न करके क्यों अपनी पत्नी नहीं बनायी, फिर यहाँ उसको वैराग्य की ओर क्यों ले गये ?