Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 69, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 69, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 69 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अन्यजगद्ब्रह्मोवाच ।
मुने शृणु यथावृत्तमिदं ते कथयाम्यहम् ।
यथावृत्तमशेषेण कथनीयं यतः सताम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
आपका आशय ठीक है कि यद्यपि मँ और यह दोनों उपदेश के लिए योग्य नहीं है, तथापि
इसने अपनी ही वासना से मुझे अज्ञानी और अपना उपदेशाधिकार स्रमझकर आपसे उपदेशार्थ
ग्रार्था की है, तथा यद्यपि मैने इसके जन्ममात्र का सम्पादन किया है/ तथापि पत्नी बनाने
के लिए मैं उत्पादित की यह हूँ. में इनकी भार्या हूँ इत्यादि भी अपनी काना से ही इसने
समझ रक्खा हैं, इसलिए वासनामात्ररुप होने के कारण अब मैं जब विदेह कैवल्य को ग्राप्त
करूँगा, तब उसके साथ-साथ स्वकल्पित ग्रपंच का भी तत्काल ही प्रलय हो जायेगा, यों
विस्तार के साथ उत्तर देने की इच्छा से कहते हैं /
अन्य जगत् के ब्रह्माजी ने कहा : हे मुने, आप सुनिये, मैं जैसा वृत्तान्त है, वैसा ही आपसे
कहता हूँ, क्योकि सज्जनं के सम्मुख जेसी घटना घटी हो, उसे अवश्य पूरी तरह कहनी ही
चाहिए