Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अनयाम्बरसंचारपरयाद्रिशिरःशिला ।
दृष्टा स्वजगदाधारभूतास्माकं तु खात्मिका ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त थिला का दर्शन भी इसको उसी सिद्धि के बल से हुआ, यह कहते हैं ।
आकाश में विचरण करने में तत्पर इस विद्याधरी ने अपने जगत् की आधारभूत पर्वत के
शिखर की शिला भी उसी सिद्धि की सामर्थ्य से देखी, जो कि हम लोगों की दृष्टि से केवल
आकाशरूप ही है