Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
महाप्रलयकालेऽस्मिंस्त्यक्तुमेषा मयाधुना ।
मुनीन्द्र नूनमारब्धा तेन वैरस्यमागता ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
मुनीन्द्र, इस महाप्रलय काल में अब इसका मूलोच्छेद कर अपनी सत्ता से गिराने के लिए मैंने
आरम्भ किया है, इसलिए इसे वैराग्य हो गया है यानी यह विनाशोन्मुख हो गई है