Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
आकाशत्वाद्यदाद्योऽयं पराकाशो भवाम्यहम् ।
तदा महाप्रलयता वासनायाश्च संक्षयः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें युक्ति बतलाते हैं ।
यह मैं जब कि चित्ताकाशस्वरूप का त्याग कर आद्य चिदाकाशरूप हो रहा हूँ, तब महाप्रलय
का स्वरूप और वासना का विनाश निश्चित है