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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

तेनैषा विरसीभूता मन्मार्गं परिधावति । नानुगच्छति को नाम निर्मातारमुदारधीः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

इसीलिए यह विरक्त होकर मेरे मार्ग की ओर दौड़ रही है, ऐसा उदारबुद्धि कौन जीव है, जो अपने जनक के पीछे दौड़ता न हो