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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

इहाद्यायं कलेरन्तश्चतुर्युगविपर्ययः । प्रजामन्विन्द्रदेवानामद्यैवान्तोऽयमागतः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, आज ही यहाँ कलिका समाप्तिकाल और चतुर्युगी का विनाश उपस्थित है एवं मनु, इन्द्र, देव आदि प्रजा का भी यह विनाश आ गया है