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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अद्यैव चायं कल्पान्तो महाकल्पान्त एव च । ममायं वासनान्तोऽद्य देहव्योमान्त एव च ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

चारों प्रकार के प्रलय आज एक ही स्राथ प्राप्त हैं यह कहते हैं । आज ही मेरे कल्प का विनाश है, महाकल्प का भी विनाश आज ही है, वासनाविनाश आज ही है और आज ही देहाकाश का विनाश है