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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

तेनेयं वासना ब्रह्मन्क्षयं गन्तुं समुद्यता । क्वेव पद्माकराशोषे गन्धलेखावतिष्ठताम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे ब्रह्मन्‌, इसीलिए आत्मदर्शन आदि कारणों को लेकर ही यह विद्याधरीरूप वासना विनाश की ओर जाने के लिए उद्यत हुई है । तालाब के सूख जाने पर गन्धलेखा कहाँ स्थित रह सकती है ?