Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यथा जडाब्धिलेखाया जायते लहरी चला ।
वासनायास्तथैवेच्छा मुधोदेत्यपकारणम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने विनाश के कारण आत्मदर्शन में इसकी इच्छा क्यो हुई. ङस प्रश्न क्र उत्तर - उसका
कैसा स्वभाव ही है, यह-युक्तिपूर्वक कहते हैं /
भद्र, जैसे जड़ समुद्रलेखा से चंचल लहरी उत्पन्न होती है, वैसे ही वासना से भी अपने विनाश
की हेतु आत्मदर्शन की इच्छा यों ही स्वभाववश उत्पन्न होती है, उसमें दूसरा कोई भी बाहरी
कारण नहीं है