Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 70, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 70, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
आभिमानिकदेहाया वासनायाः स्वभावतः ।
अस्या आत्मावलोकेच्छा स्वयमेवोपजायते ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
केवल अभिमान ही जिसका शरीर है, ऐसी इस वासना को स्वभाव से स्वयं ही
आत्मदर्शन की इच्छा उत्पन्न होती है