Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 71, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 71, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 71 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
नृत्यन्तीव तरङ्गौधैर्जलावलनवेधिनः ।
जलाचलाचलान्योन्यसंघट्टस्फोटपण्डिताः ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने जलां
के द्वारा पर्वतों को एक-दूसरे पर्वतो के साथ टकरा देने में समुद्र बड़ ही कुशल हो गये ओर इस तरह
की कुशलता प्राप्तकर जलों के नानाविध घुमाव के द्वारा वे मानों नृत्य कर रहे थे, ऐसी प्रतीति हो
रही थी