Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
कारणं सर्वकार्याणां नेता कालक्रियादिषु ।
सर्वाद्यः पुरुषः स्वैरमित्यनुत्थित उत्थितः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
सब कार्यों का कारण, काल, क्रिया आदि का
नियामक, सबका आदिभूत हिरण्यगर्भ भी अपनी इच्छा से वही बन बैठा है उत्थित न रहते हुए भी
वह उत्थित है