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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

नास्य भूतमयो देहो नास्यास्थीनि शरीरके । अवष्टब्धुमसौ मुष्ट्या शक्यते न तु केनचित् ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

न तो इसका भौतिक शरीर है और न इसके शरीर में हड्डियाँ ही हैं, अतः इसे कोई मुट्ठी से नहीं पकड़ सकता