Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 73, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 73, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 73 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सर्षपापेक्षया मेरुर्यथातिवितताकृतिः ।
तथाकाशमपि स्थूलं शून्यं सद्यदपेक्षया ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जैसे
सरसों की अपेक्षा विशाल आकारवाला सुमेरु पर्वत अति स्थूल है, वैसे ही अन्य की अपेक्षा परमसूक्ष्म
सद्रूप आकाश भी उसकी अपेक्षा अतिस्थूल है