Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 74, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 74, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
जलैश्चलचलायन्ती सुषिरानेकरन्ध्रिका ।
भूरन्तर्मण्डली लोला समुद्रद्वीपवेष्टना ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जलों से चलायमान सूराखों से पूर्ण, अनेक
छिद्रोंवाली, काम, रोग, जरा, मरण आदि से व्याकुल तथा सातां समुद्र एवं सभी द्वीप जिसके
वेष्टन हैं-करधनी एवं कटिसूत्र की जगह पर हैं, ऐसी पृथ्वी उस विराट् पुरुष की मध्यस्थ
बस्ति, जाँघ एवं नितम्बमण्डली है