Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
ज्ञस्येवाङ्ग न दोषाणां दृष्टं भस्मापि न क्वचित् ।
न लङ्घयति कैलासं यावदुल्लसितोऽनलः ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
जब तक उल्लसित हुई वह
प्रलयाग्नि कैलास पर्वत को न लाँघ सकी, इतने में ही कल्पान्त के लिए कुपित हुए रुद्र भगवान् ने
अपनी नेत्राग्नि से उस कैलास को जला दिया