Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 75, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 75, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 75 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
तावत्तं कल्पकुपितो रुद्रो नेत्राग्निनादहत् ।
दाहस्फुटद्द्रुमस्थूलशिलाचटचटारवाः ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
उम्र दाह का भी वर्णन करते हैं /
दाह से तड़कते हुए वृक्षों के तथा महाशिलाओं के चटचट शब्दोंवाले उस कैलास पर्वत के नीचे
के सभी पर्वत लकुटों तथा पत्थर के ढेलों के समूहों से मानों युद्ध करने लगे-युद्ध करते हुए के
समान प्रतीत होने लगे