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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

ब्रह्मविस्फोटितस्वाण्डकुड्यविस्फोटनोद्भटम् । अन्योन्यास्फालनोत्फालमत्तार्णवरवाविलम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यद्यपि उनकी वह ध्वनि दूर से वैसी सुन पड़ती थी, लेकिन वस्तुतः वह अत्यन्त भयंकर थी, ब्रह्माजी ने अपने अण्डे का जब भेदन किया था, तब ब्रह्माण्ड की भित्ति के विस्फोट से जैसी उन्नत दहलानेवाली ऊँची ध्वनि निकली थी, ठीक वैसी ही उनकी ध्वनि थी, परस्पर आस्फालनं द्वारा उछलते हुए मत्त समुद्रो की ध्वनि के सदृश वह बीभत्स थी