Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
ब्रह्माण्डशङ्खजठरपूरणावर्तमन्थरम् ।
स्वर्लोकरोदःपातालतलतोऽतिसगुल्मकम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, उस शब्द ने समस्त ब्रह्याण्डरूपी शंख
के उदर को भर दिया था, मरनेपर ब्रह्माण्डभित्तियों के प्रतिरोध के कारण हुए अनेक आवर्तनां
से वह बड़ा ही निबिड बन गया था, इसीलिए मानों स्वर्गलोक, अन्तरिक्ष, पृथ्वी एवं पातालतल
तक उसकी अनेक शाखाएँ फैल गई