Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 76, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 76, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 76 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
समस्तदूरदिग्भित्तिहेलाहेलनघर्षुलम् ।
महाप्रलयसंपन्नापानकापानतर्षुलम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
दूर-दूर की सम्पूर्ण दिशारूपी असीम भित्तियों को
वह ध्वनि रूप शब्द लीला से लेखन द्वारा मानों खोद रहा था, महाप्रलय मेँ मिश्रित होकर पानक
(पना) या मद्य बन गये थे, इन समुद्रो के मद्य को वह मानों पी जाने की ज्यादा इच्छा कर
रहा था