Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
ब्रह्माण्डकुड्यक्रोडाग्रकुट्टकैः कटुटांकृतैः ।
कल्पाभ्रविटपास्फोटैर्घट्टितैकार्णवारटि ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्माण्डभित्तिरूपी वक्षःस्थल में
चोट पहुँचाने वाले, कठोर टंकारसहित प्रलय कालीन मेघ के समान वृक्षरूपी हाथों के आस्फोटों
द्वारा परस्पर एकत्रित महासागर में छाती पीट-पीटकर वह सारा त्रैलोक्य रोने लग गया