Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
पूर्णाम्बरं पतल्लोकलोकसप्तकमन्दिरैः ।
चक्रावृत्त्या भ्रमद्रूपैरमरैः सागरैरिव ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
सारा आकाशमण्डल तो गिर रहे लोगों से युक्त सातों लोकों के घरों से तथा सागरो के
सदृश चक्रों के आकार में घूम रहे देवताओं से व्याप्त हो गया