Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
हेमस्फटिकवैदूर्यसुसारमणिमन्दिरैः ।
दिवः पतद्भिराकीर्णमुद्यज्झणझणस्वनैः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, आकाश से झनझन शब्दपूर्वक गिर रहे सुवर्ण, स्फटिक, वैटूर्यमणि एवं नीलम
आदि के मन्विरों से तीनों जगत् उस समय पूर्ण हो गये