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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

उत्पेतुर्धूमभस्माब्दाः पेतुर्वारा पुरोत्कराः । उन्ममज्जुस्तरङ्गौघा ममज्जुर्भूतलाद्रयः ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

उस समय धूम्र और भस्म के मेघ उठने लगे, वृष्टि के जल से पुरो के समूह आ गिरने लगे, बड़ी-बड़ी तरंगें उठने लगीं ओर भूतल, पर्वत आदि डूबने लगे