Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
मृतार्धमृतया भूतसंतत्यानिललोलया ।
अभून्नीरन्ध्रमाकाशं जीर्णपर्णसवर्णया ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
पवनां के द्वारा
उड़ाये गये मृत ओर अर्धमृत जीव-समूहों से, जो ठीक जीर्णं पत्तों के समान थे, सारा आकाशमण्डल
पूर्णं हो गया