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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

भूमण्डलबृहत्खण्डैर्भ्रष्टैः सद्वीपसागरैः । पूर्णसप्तमपातालं लुठत्पातालमण्डलैः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

उस समय सातवें पाताल तक जगत्‌ अपने स्थान से च्युत द्वीप एवं सागरो से युक्त भूमण्डल के बड़े-बड़े खण्डं से एवं लुढकते हुए अन्य पाताल- मण्डल से पूर्ण हो गया