Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
आसप्तमसुतालान्तमामहीतलपर्वतम् ।
आव्योमैकार्णवीभूतं पूर्णं प्रलयवायुभिः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
नीचे सातवें पाताल तक, मध्य में भूमण्डल तक प्रलयवायुओं के
द्वारा सारा जगत् पूर्णरूप से एक समुद्राकार हो गया