Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
मुसलोपमया पूर्वं ततः स्तम्भनिभाङ्गया ।
ततस्तालद्रुमाकारधारयासारसारया ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, तदनन्तर पहले तो मुसल के आकार में, फिर खम्भे के
आकार में और फिर तालवृक्ष के आकार में उत्तरोतर अतिस्थूल घनघोर वृष्टि की धाराएँ गिरने
लगीं