Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
ततो नदीप्रवाहोग्रजलपातैकपातया ।
सप्तद्वीपमहीपीठसममेदुरमेघया ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर नदी प्रवाह के उग्र जलपात के सदृश जलपात करनेवाली तथा सातं द्वीपों
से युक्त भूपीठ के सदृश महास्थूल धाराओं से वृष्टि होने लगी