Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
वह्निर्विदाहकृदृष्ट्या शममभ्याययौ तथा ।
शास्त्रसज्जनसंगत्या गाढमापत्पदं यथा ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त महावृष्टि से दाह
करनेवाली अग्नि ऐसे शान्त हो गई, जैसे शास्त्र एवं सज्जनों की संगति से करोड़ों दुःखों से निबिड़
आपदाओं का स्थान (अज्ञान) शान्त हो जाता है