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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

ऊर्ध्वाधरस्थपरिवृत्तपदार्थजातमन्तःकणैः खणखणायितशैलमज्जम् । ब्रह्माण्डकोटरमभूद्विधुरं कुबाललीलाविलोलमिवबिल्वफलं विशुद्धम् ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, जिसमें ऊपर और नीचे भ्रमणशील अनेक पदार्थ थे, भीतर जलकणों के कारण पर्वतरूपी मज्जा खनखन ध्वनि कर रही थी, ऐसा समस्त ब्रह्माण्डरूपी कोटर इस प्रकार विनष्ट हो गया, जिस प्रकार बालकों की कुत्सित (तोड़-फोड़ कारक) क्रीड़ाओं से चंचल हुआ विशुद्ध बिल्वफल विनष्ट हो जाता है