Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
जलानलानिलोल्लासस्फुटत्कोटिगताश्मनाम् ।
प्रविघट्टनटंकारैर्जडीभूताक्षकश्रुति ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय वहाँ यह हालत रही कि जल, अग्नि एवं वायु का
जो विविध ताण्डव हो रहा था उससे बड़े-बड़े पत्थर ऊपर की ओर उड़े जा रहे थे, इनका जो
परस्पर आघात हो रहा था ओर जो उससे टंकारध्वनि निकल रही शी, उससे सबकी श्रोत्रेन्द्रियाँ
(कान) जड़ हो गई थीं