Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 77, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 77, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 77 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
नभःस्तम्भनिभाबन्धधारानीरन्ध्रवर्षणैः ।
कर्षणैः कल्पवह्नीनां छमच्छमघनध्वनि ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
आकाश में खम्भों के सदृश जल की अन्धाधुन्ध-अविच्छिन्न-
धाराओं की वर्षा द्वारा जो कल्पान्त अग्नियों का विदारण (विनाश) हो रहा था, उससे वहाँ छम-
छम शब्दों की घन ध्वनि हो रही थी