Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
शरद्व्योमसमाभ्गेगैर्वलद्भिर्बुद्गुदेक्षणैः ।
पश्यन्निव नदीधारान्भेघानाताम्रपूरकान् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
शरत्काल के आकाश के सदृश विशाल उठ रहे
बुद्बुदोंरूपी नेत्रो से वह नदियों के समान धारावाले चारों ओर लालिमा से व्याप्त मेघों को मानों देख
रहा था