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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

पुष्करावर्तकाभ्राणां बहुभिर्वीचिमण्डलैः । कुर्वन्नालिङ्गनानीव सपक्षाद्रिवदुत्थितैः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, यह प्रलयकाल का समुद्र पंखसहित पर्वतो के तुल्य आविर्भूत हुए अनेक तरंगमण्डलों से पुष्करावर्तक आदि मेघों का मानो आलिंगन कर रहा था