Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
नदीधाराधरैरूर्ध्वे मध्ये दग्धैर्धराधरैः ।
अधो धराधरैर्नागैरधरः पङ्कगैर्वृतः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी,
धरा से शून्य वह सागर ऊपर नदी के सदृश धाराओंवाले मेघो से, मध्य में दग्ध पर्वतां से तथा नीचे
पंक में रहनेवाले नागों से आवृत था