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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

नभःस्तम्भवृहद्धानोत्तालभास्करपुष्करः । धाराजालमहाम्भोदविलीननलिनीदलः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

इन नालों मे जो बड़ी कर्णिकाएँ थीं उनमें बीजभूत किरणों के द्वारा उत्ताल हुए बारह आदित्य ही उसमें कमल से प्रतीत हो रहे थे ओर धारासमूह रूपी महामेघ ही उसमें जल के ऊपर संलग्न होने के कारण विलिनप्राय कमलिनी के पत्ते थे