Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 78, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 78, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
डिण्डीरपर्वतप्रान्तनददुन्मत्तवारिदः ।
भ्रमदिन्द्रानिलार्केन्दुपुरपत्तनपूरणैः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसमें उत्पन्न रनों के बड़े-बड़े पर्वतां के प्रान्तभाग में उन्मत्त
मेघ शब्द कर रहे थे और घूम रहे इन्द्र, वायु, सूर्य, चन्द्र, ग्राम एवं नगरों के समूहों से वह भर गया
था