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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 8, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 8, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अहंत्वभावाच्चाहंत्वमस्ति संसारबीजकम् । नाहंत्वभावान्नाहंत्वमस्तीति ज्ञानमुत्तमम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

शरीर आदि में अहंभावना करने से संसार का बीज अहंकार रहता है सर्वत्र अहंभाव करने से वह नहीं रहता, यही सर्वोत्तम ज्ञान हे